नीति आयोग ने आर्थिक वृद्धि दर
में गिरावट के लिए रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन और यूपीए सरकार की
नीतियों को ज़िम्मेदार ठहराया है.
आयोग के उपाध्यक्ष राजीव कुमार ने
कहा कि देश की विकास दर नोटबंदी के कारण नहीं, बल्कि बैंकों पर बढ़ते फंसे
कर्ज के बोझ के कारण गिरी.
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उन्होंने कहा कि नोटबंदी के कारण विकास दर
गिरा है, इसके कोई सबूत नहीं मिले हैं. जब नरेंद्र मोदी की सरकार आई, तो
बैंकों में एनपीए चार लाख करोड़ था, जो 2017 के मध्य में 10.5 लाख करोड़ तक
पहुंच गया.
पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और वित्त मंत्री पी चिदंबरम में ने आरोप लगाया था कि नोटबंदी के कारण विकास दर में गिरावट हुई है.
कर्नाटक में स्थानीय शहरी निकाय चुनावों में कांग्रेस को सबसे अधिक सीटें मिली हैं. कांग्रेस ने 982 सीटों पर जीत दर्ज की है.हीं, भाजपा ने 929 और जनता दल सेकुलर ने 375 सीटों पर जीत दर्ज की. कुल
2961 में से अब तक घोषित 2079 सीटों के नतीजों और रुझाने के अनुसार
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नसभा चुनावों के बाद भाजपा को एक बार फिर मायूसी हाथ लगी है.
इस चुनाव में कांग्रेस और जनता दल सेकुलर अलग-अलग चुनाव मैदान में थे.
इस साल मॉनसून में अब तक 10 राज्यों में बारिश, बाढ़ और भूस्खलन में 1400 से ज़्यादा लोगों की मौत हुई है.
इन
मौतों में केरल में हुई 488 मौतें शामिल हैं. गृह मंत्रालय के मुताबिक़
केरल की बाढ़ में करीब 54.11 लाख लोग प्रभावित हुए हैं. विस्थापितों की
संख्या 14.52 लाख हैं, जो शिविरों में रह रहे हैं.
भारत में सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने टीवी चैनलों के लिए एडवाइजरी
जारी की है और कहा है कि वे 'दलित' की जगह 'अनुसूचित जाति' शब्द का
इस्तेमाल करें.
मंत्रालय की ओर से ये एडवाइजरी इस साल जून में बॉम्बे हाई कोर्ट की ओर से आए निर्देश के बाद जारी की गई है.
बॉम्बे हाई कोर्ट ने कहा था कि सरकार मीडिया में दलित शब्द के इस्तेमाल पर रोक लगाने पर विचार करे.
फ़िलहाल
ये एडवाइजरी सिर्फ़ टीवी चैनल्स के लिए आई है. अभी ये स्पष्ट नहीं है कि
भविष्य में इसके दायरे में समाचारपत्र और पत्रिकाएँ भी आएँगी या नहीं.
गंभीर आर्थिक संकट से जूझ रहे अर्जेंटीना के राष्ट्रपति मारीसिया मैक्री
ने देश में पैदा हुए 'आपातकाल' जैसे हालात और देश की मुद्रा पीसो की
लगातार गिरती कीमत से मुक़ाबला करने के लिए कड़े क़दम उठाने का फ़ैसला किया
है.
मैक्री ने टीवी पर राष्ट्र के नाम संबोधन में कहा कि अ
र्जेंटीना आमदनी से ज़्यादा ख़र्च करने की आदत बरकरार नहीं रख सकता.
उन्होंने
कहा, "मैंने मंत्रियों की संख्या घटाकर आधे से भी कम करने का फ़ैसला किया
है. सरकारों के सामने अलग-अलग तरह का वक़्त आता है और अलग लम्हों में अलग
टीमों की ज़रूरत पड़ती है.
हालांकि सरकार ने अभी ये जानकारी नहीं दी
है कि किन मंत्रालयों को बंद किया जाएगा या फिर किन-किन मंत्रालयों को आपस
में मिला दिया जाएगा.
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केरल में आई बाढ़ के बाद जलस्तर तो कम हुआ है, लेकिन वहां के लोगों की मुसीबतें कम नहीं हुई हैं.
यहां पिछले दो दिनों में 'रैट फ़ीवर' यानी चूहे की वजह से होने वाली बीमारी से कम से कम 11 लोगों की मौत हो चुकी है.
राज्य के कई हिस्सों में यह महामारी तेज़ी से फैल रही है.
केरल सरकार ने इस सिलसिले में रेड अलर्ट भी जारी किया है.
वहीं,
स्वास्थ्य अधिकारियों का कहना है कि हालात काबू में हैं क्योंकि ये मौतें
13 में से पांच ज़िलों में हुई हैं. ये वही पांच ज़िले हैं जो बाढ़ से सबसे
ज़्यादा प्रभावित हुए हैं.
राज्य सरकार ने ऐहतियात के तौर पर लोगों से डॉक्सीसाइक्लिन की टैबलेट लेने को कहा है.
स्वास्थ्य अधिकारियों का अनुमान है कि दवा न लेने वाले लोगों को बुख़ार और मांसपेशियों में दर्द की शिकायत हो रही है.
केरल सरकार के अतिरिक्त मुख्य सचिव (स्वास्थ्य) राजीव सदानंदन ने बीबीसी
हिंदी को बताया, "राज्य में अभी ऐसे हालात हैं जिनमें महामारी फैलने की
पूरी आशंका है. इसलिए हम लोगों से रोकथाम के तौर पर डॉक्सीसाइक्लिन की
गोलियां लेने को कह रहे हैं."
सदानंदन ने बताया कि उन्हें रविवार को सात और सोमवार को चार मौतों की जानकारी मिली है.
केरल
में जनवरी से लेकर तीन सितंबर तक लेप्टोस्पायरोसिस (रैट फ़ीवर) से 41
लोगों की मौत की पुष्टि हुई है. इन तीन महीनों में राज्य में रैट फ़ीवर के
821 मामले
सामने आए हैं.
जिन ज़िलों में इसका सबसे ज़्यादा असर देखा गया है, वो हैं- त्रिशूर, पलक्कड़, कोझिकोड, मल्लपुरम और कन्नूर.
नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ़ मेंटल हेल्थ एंड न्यूरो साइंसेज़ में वायरॉलजी के
प्रोफ़ेसर डॉक्टर वी रवि ने बताया, "लेप्टोस्पायिरो एक जीवाणु है जो चूहों
में पाया जाता है. बाढ़ के दौरान जब चूहे भींग जाते हैं तब ये बैक्टीरिया
इंसानों में पहुंच जाता है."
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डॉ. रवि के मुताबिक़ बाढ़ के पानी के
संपर्क में आने वाले लोगों को डॉक्सीसाइक्लिन की गोलियां लेनी चाहिए
क्योंकि जीवाणुओं के जरिए फैलने वाला ये संक्रमण इंसान के शरीर पर असर
दिखाने के लिए महज दो हफ़्ते का वक़्त लेता है.
कई बार रैट फ़ीवर से पीड़ित व्यक्ति के लिवर और किडनी पर भी इसका असर होता है.
डॉ.
रवि के मुताबिक़ बाढ़ के पानी के संपर्क में आने वाले लोगों
को कम से कम एक हफ़्ते तक डॉक्सीसाइक्लिन की गोलियां और पेंसिलिन का इंजेक्शन लेना
चाहिए.यूरो सर्जन और केरल प्लानिंग बोर्ड के सदस्य डॉक्टर इक़बाल के अनुसार
बाढ़ के बाद अक्सर हैजा, टायफ़ाइड, दस्त, हेपेटाइटिस और रैट फ़ीवर जैसी
बीमारियां होने का डर रहता है.
उन्होंने कहा, "लोग अब राहत शिविरों
से घरों में लौट रहे हैं और बहुत से घरों में बाढ़ का पानी अब भी साफ़ नहीं
हुआ है. ऐसे में बीमारियां होनी स्वाभाविक है."
वहीं केरल की
स्वास्थ्य सेवा निदेशक डॉक्टर सरिता ने कहा कि राज्य के सभी अस्पतालों में
डॉक्सीसाइक्लिन की गोलियां और पेंसिलिन के इंजेक्शन उपलब्ध हैं. उन्होंने
कहा कि प्राइवेट अस्पतालों को भी रैट फ़ीवर से पीड़ित लोगों का तत्परता से
इलाज करने के निर्देश दे दिए गए हैं.
केरल में बाढ़ की वजह से 350
से ज़्यादा लोगों की मौत हो गई थी और कम से कम 10 लाख लोगों को घर छोड़कर
राहत शिविरों में शरण
लेनी पड़ी थी.